Swarajya Rakshak Sambhaji Maharaj Biography In Hindi

Swarajya Rakshak Sambhaji Maharaj Biography In Hindi

इतिहास में कई वीर राजा हुए जिन्होंने अपना पूरा जीवन प्रजा की सेवा में ही निकाल दिया I यहाँ तक की जरूरत पड़ने पर वे अपने प्राणों की बाजी लगाने तक से पीछे नहीं हटे I छत्रपति संभाजी महाराज (Swarajya Rakshak Sambhaji Maharaj bhosle) की गिनती भी ऐसे ही राजाओं में होती है I

कहते है मुगलों का जब भारत में शासन था तो कुछ मुग़ल शासक निरंकुश नीति अपनाते हुए लोगों पर जुल्म करने पर उतारू हो गये थे ऐसे में छत्रपति संभाजी राजे भोसले ने मोर्चा संभाला और मुगलों को मुह तोड़ जवाब दिया I मुगलों के जुल्मों के खिलाफ लड़ते हुए उन्होंने अपने प्राणों की आहुति तक दे दी लेकिन मुगलों के सामने झुकना पसंद नहीं किया I

संभाजी महाराज जीवन परिचय (Sambhaji Maharaj Biography, Family, Father, and Mother)

छत्रपति संभाजी महाराज मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी के बेटे थे उनकी माता का नाम सईं बाई था I छत्रपति संभाजी का जन्म 14 मई 1657 को पुणे में हुआ था I वे ठीक से चलना भी सीख नहीं  पाए थे की उनकी माता सई बाई का निधन हो गया इस समय उनकी उम्र मात्र 2 वर्ष की थी I उनकी माता के निधन के बाद उनका पालन पोषण उनकी दादी जीजा बाई ने किया था, जैसे हो वह थोड़े बड़े हुए उनके पिता शिवाजी ने उन्हें आमेर के राजा जय सिंह के पास रहने के लिए भेज दिया I

संभाजी जी मात्र 9 वर्ष की उम्र में ही राजनीति के पाठ पढना शुरू कर दिया ताकि वे मुगलों की रणनीति को समझ कर उनका बखूबी जवाब दे सके I संभाजी महाराज कितने बुद्धिमान थे इस बात का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते है की मात्र 13 वर्ष की आयु में ही वे 13 भाषाए सीख चुके थे I उन्होंने संस्कृत में कई शाश्त्र भी लिखे, उनके तीन ग्रन्थ सातसतक,नखशिख,नायिकाभेद आज भी काफी प्रसिद्ध है इसके साथ साथ घुड़सवारी, तींदाजी, तलवारबाजी उनके बाएं हाथ का खेल था I

जब संभाजी 9 वर्ष के थे तब इनके पिता शिवाजी इनको अपने साथ 1250 किलोमीटर दूर घोड़े पर लेकर औरंगजेब से मिलने गये, वहां पहुँच कर औरंगजेब ने पहले शिवाजी की खूब बेज्ज्त्ती की और बाद में कैदी बना कर कारागर मर डाल दिया, उस समय संभाजी ने अपनी सूझ-बुझ से अपने पिता को कारागार से बाहर निकाला और खुद भी गायब हो गये I संभाजी महाराज 16 साल की उम्र में पहले युद्ध लड़ने गये और ये युद्ध वे जीत कर लौटे I बाद में शिवाजी में मृत्यु के बाद वे उत्तराधिकारी बने और मराठा साम्राज्य की बागडोर संभाली I

Sambhaji Maharaj Height, Weight and Family

Father and Motherछत्रपति शिवाजीऔर माता सईं बाई (Chhtrapati Shivaji Maharaj, Sai Bai)
Height and Weightहाइट लगभग 6ft 2inches, वजन लगभग 110 किलो
Sonशाहू भोसले (Shahu Bhosale)
Brotherराजाराम प्रथम (Rajaram I)

संभाजी महाराज का निजी जीवन (personal Life of Swarajya Rakshak Sambhaji Maharaj Wife, Son, Achievements)

उनके निजी जीवन की बात की जाए तो संभाजी महाराज ने राजनैतिक समझौते के चलते येसु बाई से विवाह कर लिया I साहू भोसले इन दोनों के पुत्र थे I संभाजी भोसले अपनी शौर्यता के लिए प्रसिद्ध रहे उन्होंने बेहद कम समय के शासन काल में करीब 120 युद्ध लडे जिनमे उनकी सेना का पराक्रम हमेशा दूसरों पर भारी पड़ा I कहते है उन्होंने दिल्ली के बादशाह रहे औरंगजेब की नाक में दम कर रखा था और कई बार युद्ध में मुगलों की सेना को धूल चटा चुके थे I

संभाजी के जिस वक़्त सत्ता संभाली थी उस वक़्त मुगलों के अलावा पुर्तगालियों ने भी लोगों का जीना दुस्वार कर रखा था I संभाजी को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने पुर्तगालियों के खिलाफ मोर्चा शुरू कर दिया उन्होंने पुर्तगालियों पर तब तक हमले बंद नहीं किये जब तक पुर्तगालियों ने लोगों पर जुल्म करने बंद नही किये I संभाजी के सैनिक लगातार पुर्तगालियों पर सर्वनाश करते रहे इस कारण पुर्तगाली भी बौखला चुके थे और उनको समझ नही आ रहा था की वे क्या करे I

उन्होंने संभाजी को अपने रास्ते से हटाने की हर संभव कोशिश को पर वो असफल रहे, इस तरह सन 1683 आते आते संभाजी पुर्गालियों को पराजित करते हुए लोगों को उनके जुल्मों से राहत दिलाने में सफल हो गये I

16 जनवरी 1681 में  संभाजी राजे छत्रपति बने मराठों के लिए यह पहले राजपुत्र थे जो छत्रपति बने थे I छत्रपति बनते ही उन्हें यह एहसास हुआ की मराठा साम्राज्य के पास धन धन्य की बहुत कमी थी जिसके चलते इन्होने औरंगजेब के औरंगाबाद और गुर्हानपुर पर आक्रमण करके काफी बड़ी मात्रा में धन और जेवरात जमा की I

स्वराज्य रक्षक संभाजी और औरंगजेब के बीच लड़ाई (Battle Between Swarajya Rakshak Sambhaji Maharaj and Aurangzeb)

औरंगजेब किसी भी कीमत पर उनको बंदी बनाना चाहता था और इसलिए उसने ये कसम खाई की जब तक संभाजी पकडे नहीं जाते तब तक वह अपना ताज सर पर नहीं पहनेंगे I औरंगजेब ने गुस्सा कर आगरा छोड़ा और सीधे संभाजी राजे को सबक सिखाने का फैसला लिया I मराठों को सबक सिखाने के लिए औरंगजेब ने महाराष्ट्र की ओर अपने 5 लाख सैनिक और 4 लाख जानवर जिनमे ऊंट घोड़े, और हाथी काफी मात्रा में शामिल थे, उन सबके साथ निकल पड़ा I मराठो की जान गढ़ किलों में हुआ करती थी इसलिए औरंगजेब ने सबसे पहले नासिक के रामशेज किले को अपना निशाना बनाया I

उस समय औरंगजेब का सबसे बहादुर सेनापति शाहबुद्दीन था, शहाबुद्दीन खान अपने 10 हज़ार सैनिकों को और उतने ही जानवरों को लेकर रामशेज किले के पास पहुँच गया I पहले दिन जब शाहबुद्दीन खान ने अपने सैनिकों के साथ रामशेज किला चढ़ने की कोशिश की तो ऊपर बैठे 600 मराठा सैनिकों ने पत्थरों से उनका स्वागत किया I

अगले दो साल तक शाहबुद्दीन खान कोशिश करता रहा, उसके पश्चात औरंगजेब ने शाहबुद्दीन खान को लौटने का आदेश दे दिया I उसके बाद औरंगजेब ने अपने अगले सेनापति फ़तेह खान को राचेत जीतने भेजा, वहां फ़तेह खान अपने साथ 20 हज़ार सैनिकों को लाकर गया I फ़तेह खान की तरकीबे शाहबुद्दीन से बिलकुल अलग थी, फ़तेह खान कभी ऊपर चढ़ने की करता तो कभी तोपों की मदद से किले को जीतने की कोशिश करता I

रात के सन्नाटे में कभी मराठे नीचे आकर बम, गोले चुरा कर ले जाते तो कभी नीचे आकर तोपों को आग लगा कर जला देते I औरंगजेब के कई सेनापति लगातार 6 साल तक लड़ते रहे लेकिन 600 मराठों ने उन्हें रोके रखा, इस बीच संभाजी कई युद्ध जीतते ले गये I

संभाजी महाराज की जीत और बलिदान (Sambhaji Maharaj’s victory and sacrifice)

संभाजी की सेना अपनी जीत का डंका मद्रास तक लहरा चुकी थी I गोवा में बसे पुर्तगालियों पर जब संभाजी राजे ने हमला बोला तब उसी समय संभाजी राजे को यह सुचना मिली की औरंगजेब अपनी सेना को लेकर रायगढ़ की ओर बढ़ रहा है तो उन्हें तुरंत पीछे की ओर मुड़ना पड़ा था I संभाजी राजे से सीधे युद्ध में जीतना इतना आसान नहीं था इसलिए औरंगजेब ने उनके करीबी रिश्तेदारों के जरिये धोखे से रायगढ़ से दूर बुलवाया I

रिश्तेदारों द्वारा धोखा देने की बात संभाजी को जब पता चली तब संभाजी अपने दोस्त और सलाहकार रविकलश के साथ रायगढ़ किले की ओर निकल पड़े लेकिन औरंगजेब अपनी पूरा सेना के साथ रायगढ़ को घेरे हुए था I संभाजी को निहत्था देख औरन्ह्जेब की सेना ने उन्हें घेर लिया लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हुई उनको हाथ लगाने की, दूर से रस्सियों का जाल बिछा का संभाजी और उनके दोस्त को कैद किया गया I

अगले दो दिन औरंगजेब का सेनापति बिना रुके संभाजी को औरंगाबाद के लेकर गया और वहां पहुँचते ही औरंगजेब ने संभाजी और रविकलश को ऊंट पर उल्टा लटका दिया और पूरे शहर में घुमाया और अपने लोगों से कहा की इनको पत्थर से मारों और इनपर मूत्र त्यागो I

उसके बाद दोनों को कारागार में डाल वहां औरंगजेब उनसे मिलने आया और संभाजी के सामने 3 शर्त रखी की तुम मराठा राज्य मेरे हवाले कर दो, जितना सोना तुमने चुराया है सब मेरे हवाले कर दो और तुम अपना धर्म परिवर्तन कर लो, मेरी ये 3 शर्ते मान लो आज ही तुम्हे रिहा कर दूंगा I लेकिन संभाजी महाराज ने उनकी सारी शर्ते मानने से इनकार कर दिया और अन्न जल का त्याग कर दिया I

संभाजी महाराज की मृत्यु (Death of Swarajya Rakshak Sambhaji Maharaj)

औरंगजेब के सैनिकों ने संभाजी और रवि कलश के नाखून उखाड़ दिए और आँखों में मिर्ची डाल दी उसके बाद गर्म सरियों से उनकी आँखे फोड़ दी, लेकिन संभाजी राजे अपनी बात पर अड़े रहे और अपना सिर झुकने नहीं दिया I बाद में सैनिकों ने संभाजी के हाथ काट दिए, शरीर से खाल उतार दी I

40 दिन कष्ट देने के बाद औरंगजेब हार मान गया और बोला मेरी 4 संतान है अगर मेरा एक भी बेटा तेरे जैसा होता तो पूरे देश मुग़ल सल्तनत बना देता और इतने कहते ही अपने सैनिकों को आदेश दिया की इसका पूरा शरीर काट दो I संभाजी के शरीर के छोटे छोटे टुकड़े करके नदी में फैक दिए गये I

जब छत्रपति संभाजी के शरीर के टुकड़े तुलापुर नदी में फैंके गए तो उस किनारे रहने वाले लोगों ने उनको इक्कठा करके सिला के जोड़ दिए और विधि विधान से उनका अंतिम संस्कार किया I

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